
Dashrath sharma
जब कोई गलत करता है तो अपना बहीखाता बराबर करना ही हमारी नियत होती है। हा जिसे हम न्याय के रहे है वो अहंकार ही है क्योंकि हम बदला लेते है तो अहंकार है पर हम उसे अपनी नजर में उसे जायज रखते है। क्योंकि कि हम जैसा कि तैसा करने को कहते है यही ही हम न्याय कहते है कि जिसने हमारे साथ जैसा कि मैने भी वैसा किया है ना















