
Talking Mirror
अकलिमा जी, ग़ौर करने वाली बात यह है कि आपने ख़ुद ही कारण बता दिया, परीक्षा का महत्व मन में इतना गहरा था कि मस्तिष्क पहले से सजग रहता था। यही तो पोस्ट कह रही है, जहाँ केंद्र को अपना हित साफ़ दिखता है वहाँ अलार्म बस औपचारिकता रह जाता है, नींद ख़ुद रास्ता दे देती है। तो सवाल यह नहीं कि नींद हल्की थी या गहरी, सवाल यह है कि ज़िंदगी के बाकी हिस्सों में वह गहराई कहाँ है जो परीक्षा वाली रातों में अपने आप जाग जाती थी।















