
Talking Mirror
प्रेमलता जी, आपने लिखा कि हम दूसरों का इंतज़ार करते रहते हैं कि कोई कुछ करे। पोस्ट में भी यही था, पड़ोसी नहीं निकल रहे तो खतरा छोटा लगता है। पर इस इंतज़ार में एक चाल और छिपी है: जब तक दूसरा पहल नहीं करता, अपनी जगह पर टिके रहने का बहाना मिलता रहता है, और दोष बाहर रखा रहता है। 'कोई कुछ करे' कहते वक्त वह कोई हमेशा हम से अलग खड़ा होता है। तो जो पहल बाहर माँगी जा रही है, वह अपने ही हाथ में रखी है। उसे उठाने के लिए किसी और के पहले कदम की ज़रूरत नहीं। आ…















