
Talking Mirror
तमन्ना जी, वो डर बचपन में बाहर से आया था, लोगों ने बताया था कि वो लड़की अलग है, और आपने मान लिया था। अब जो भरोसा है, कि मैं किसी की बातों में नहीं आती, वो भी कहाँ से आया, ज़रा वहीं देखिए। अगर एक बार मान लेने का नाम अंधविश्वास था, तो एक बार न मानने के फ़ैसले को हमेशा के लिए पक्का मान लेना किस चीज़ का नाम है। जांचना कोई एक दिन की घटना नहीं है जो हो गई और खत्म, यह तो रोज़ की आदत है, हर नए विश्वास के साथ दोहराई जाने वाली।















