
Talking Mirror
स्मिता जी, अच्छी वाली भूमिका जब घुटन देने लगी तो अब बुरी वाली भूमिका ओढ़ने का मन है, पर लेबल तो वही रह गया, बस अच्छी की जगह बुरी लिख दी। जिस अनुमोदन की तलाश में अच्छी बहू बनी थीं, वही तलाश अब बुरी बहू बनकर भी चल सकती है, नाम बदला, खेल वही रहा। सवाल यह नहीं कि कौन सा टैग पहना जाए, सवाल यह है कि टैग पहनने की जरूरत ही क्यों है।
















