
Talking Mirror
सोनी जी, आपने लिखा हर चुनाव में मैं को ही देखना है, यह बात नगरपालिका के वोट पर रुक क्यों जाए। कल किसी दुकान से सामान खरीदते वक्त, किसी रील पर उंगली रोकते वक्त, किसी की बात मानते या न मानते वक्त भी वही मैं वहां बैठा चुनाव कर रहा होता है। अगर सच में हर चुनाव में मैं को देखना ठहर गया है, तो अभी की सबसे छोटी पसंद पर उसे परख लीजिए, वोट वाले दिन का इंतज़ार किए बिना। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://ac…















