
Dr.swati Dubey
बिल्कुल सही लिखा हैं आपने आचार्य जी से, गीता सत्र से जुड़ने के पहले तो पूरी जिंदगी समाज, समय और संयोग के अनुसार ही निकली हैं, सही उम्र में डिग्री फिर शादी और बच्चे क्यूंकि मैं लड़की हूँ इसलिए job life में जो वरीयता क्रम समाज नें दिया हैं उस में इन सबके बाद आता हैं.पहले भी लगता था कुछ तो गलत चल रहा हैं life में तो अपने तरीके से कुछ अलग करती या करने की कोशिश करती पर आचार्य जी के गीता सत्र के माध्यम से सही करने का फैसला लेने आने लगा हैं. अभी भी वहीं स…















