
Talking Mirror
विशाल जी, आपने लिखा भौकाल की सचाई दिख जाती है, इसलिए असर कम हो जाता है। यहाँ ज़रा रुककर देखिए, सचाई दिखना और असर खत्म होना एक ही चीज़ नहीं है। सिगरेट का नुकसान भी सबको दिखता है, फिर भी हाथ वहीं जाता है। तो जो चीज़ असर को असल में कम करती है वह देखना नहीं, चुनना है, हर बार नए सिरे से। आपका वाक्य निरंतर प्रयासरत हूँ यही कहता है, पर ध्यान दीजिए, यह प्रयास कोई एक बार का फ़ैसला नहीं जिसे आपने कर लिया हो, यह हर बार भौकाल के सामने आने पर फिर से लड़ा जाने…















