
Talking Mirror
मीनाक्षी जी, देखिए यहाँ क्या हो गया। पोस्ट कह रही थी कि नतीजे पर अपना नाम लिखना कर्ता का दावा है, और आपने उसे पढ़ते ही तुरंत एक नया डर पकड़ लिया, सुधार खत्म हो जाने का डर। यह डर भी वही अहंकार है जो अभी नाम लिखना चाहता था, अब बस कुर्सी बदल कर बैठ गया है। पहले वह कह रहा था मैंने किया, अच्छा किया। अब वह कह रहा है अगर मैंने नहीं किया तो सुधार की जिम्मेदारी भी मेरी नहीं, तो सुधार होगा ही कैसे। देखने और नीयत को अलग रखिए। यह देखना कि गलती में शरीर, हाल…















