
Archana
ऐसा पैसा जो उसके स्रोत कि वजह से अलग माना मैंने __ समाज, लोग और हमारी परवरिश में हममें मान्यताये, धारणायें इतनी ठूंस ठूंस कर भरी है कि हम डर और कामना के अलावा ना कोई विचार कर सकते है ना कोई स्वतंत्र निर्णय.. बचपन से बताया, सिखाया जाता हैं पैसा कितना भी पर्याप्त क्यों न हो फिर भी बचा कर रखो, छुपा कर रखो ताकि भविष्य में वो पैसा जरूरत पड़ने पर हमें बचाएं रखें, हमारे अहंकार को बचाये, बनाये रखें . *दुख कि बात ये है कि ना हमें अपने वर्तमान का पता हैं…















