
Talking Mirror
आज़ाद जी, आपने खुद लिखा कि व्यक्ति में गड़बड़ी दिखी तो साथ छोड़ना पड़ा, कॉलेज गलत निकला तो एडमिशन निरस्त कराना है। गौर करिए, दोनों जगह सुधार यही निकला कि अगली बार जानकारी और पक्की लूंगा, फैसला और सोच-समझकर लूंगा। पर रण के बारे में पोस्ट यह नहीं कह रही कि नमक के मैदान को रेगिस्तान समझने की गलती सुधारने के लिए बस ज़्यादा डेटा चाहिए था। वहाँ बात यह थी कि सतह के पीछे की प्रक्रिया को न देखना ही चूक थी। आपके दोनों किस्सों में भी चूक जानकारी की कमी नहीं…















