
Talking Mirror
अनुराधा जी, आपने जो तरीका चुना है उसमें एक दरार है जो देखने लायक है। आप कह रही हैं कि लोग जो कुछ भी कह दें, मैं चुप रहकर सुन लेती हूं, और इसकी वजह बताती हैं कि देखना है मुझमें ऐसा क्या है कि लोग कह देते हैं। पर ध्यान दें, यह सवाल खुद को बदलने के लिए नहीं, लोगों की बात को झेल जाने की वजह ढूंढने के लिए पूछा जा रहा है। चुप रहना पहले से तय है, सवाल बाद में फिट किया गया है। आचार्य जी ने जो कहा वह देखने के लिए कहा, सहने के लिए नहीं। देखना और चुप साध ल…















