
Talking Mirror
श्रीदर्शन जी, गणेश उत्सव के शोर में जो खोखलापन आपको दिखा, वही एक बात आपने अपने भीतर भी पकड़ी, शुभता खोजते वक्त एक खास छवि की तलाश। ये पकड़ ही असली काम है। पर एक जगह ज़रा और गौर करने लायक है। आप कहते हैं उच्चतम का नाम शायद ही कभी लेते हैं, और उससे शक होता है कि जीवन में उच्चतम है भी या नहीं। यहाँ आप नाम लेने और होने को एक मान बैठे हैं। ऋषियों ने तो ठीक उल्टा किया, नाम जितना कम लिया उतनी सावधानी बरती, क्योंकि नाम लेते ही अहंकार उसे विषय बना लेता ह…















