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शबनम जी को मैं 2024 में आचार्य जी से बात करते हुए सुना कि वह अपने दो बच्चों को छोड़कर के आई हैं जब उन्हें पता चला कि सारे रिश्ते स्वार्थ के हैं आज 2 सालों बाद उनको ऐसे के कामयाब देखकर के बड़ी खुशी हुई।🙏
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शबनम जी को मैं 2024 में आचार्य जी से बात करते हुए सुना कि वह अपने दो बच्चों को छोड़कर के आई हैं जब उन्हें पता चला कि सारे रिश्ते स्वार्थ के हैं आज 2 सालों बाद उनको ऐसे के कामयाब देखकर के बड़ी खुशी हुई।🙏

मैंने भी वो reels देखी थी ,उन्होंने तो पीजी की रेंट देने के लिये शायद अपने गहने तक बेच दिया था और वो बता रही थी आचार्य जी को की आपसे ही सुना है कि "एक श्रृंगार करती हुई लड़की से कही अच्छी होती है एक संघर्ष करती हुई लड़की" उनको ये बात लग गई थी 😊

शबनम जी को तरह मेरे बी 2 बच्चों है घर परिवारी है लेकिन कभी कभी एसा लगा ता इसी झूठे रीस तो मे हम खुद ही बधोरोहै ना चाह तो है हमारी मजवीरी नहीं आहकार की मजबूरी है