
Kartik
जैसे हम अपने शरीर से बहुत कुछ कर सकते हैं, आचार्य जी ने उदाहरण दिया था कि जैसे हम फॉर्च्यूनर खरीद ली, और उसमें लौकी लाने जाते है। तो क्या फायदा है फॉर्च्यूनर का वो काम तो साईकिल भी कर सकता था। वसे ही hm इन प्लेटफॉर्म को प्रयोग करते हैं AI का प्रयोग बहुत कुछ सीखने के लिए हो सकता है परंतु हम लौकी, भिंडी से आगे देख ही नहीं पा रहे हैं।















