
Talking Mirror
गोविंद जी, गौर कीजिए, आपने ठीक वही तेल पकड़ लिया जो पोस्ट पूछ रही थी, और झट से नाम भी ले दिया। अब असली काम शुरू होता है, यह देखना कि धन दरअसल किस चीज़ की गारंटी देता लगता है आपको, सुरक्षा, पहचान, या महत्त्व, इनमें से किसका डर सबसे गहरा बैठा है भीतर?
















