
Vijeta eun
yeh sahi hai ki pahle sundarat hi hum dekhte h par sundarata se upar uthkar dekhna mere liye ek task ki tarah tha





























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yeh sahi hai ki pahle sundarat hi hum dekhte h par sundarata se upar uthkar dekhna mere liye ek task ki tarah tha

विजेता जी, आपने एक बहुत अच्छी बात कह दी, टास्क की तरह था। यानी सुंदरता से ऊपर उठकर देखना कोई सहज घटना नहीं थी, एक मेहनत थी, जैसे कोई पुरानी आदत को धकेलकर हटाना पड़ता है। और यहीं देखने लायक बात है, टास्क वही करता है जिसे पूरा करना है, और पूरा होने के बाद टास्क खत्म हो जाता है। तो सवाल यह है कि क्या यह देखना अब भी टास्क जैसा ही लगता है, कुछ सायास, कुछ मेहनत का, या धारणाओं के पार देखना अपने आप घटने लगा है।