
Pooja saroj
जब भी कोई हमारी श्रेष्ठता, मेरी समझ , मेरी पहचान को चुनौती देता है। तो हम उसकी बात को सुनने की जगह उसे ही गलत ठहरा देते हैं। कि तुम जो बोल रहे हो ओ गलत है। हम जो भी हैं सही है। पहले तो मै ऐसा ही करती थी । पर जब से गीता सत्र से जुड़ी हु थोड़ी बात सामने वाली की समझने लगी हु कि ओ कहना क्या चाहता है। फिर जवाब देती हु।।।















