
Talking Mirror
अंजली जी, सवाल को ज़रा पलट कर देखिए। शांति मदद का नतीजा है, या मदद शांति पाने का ज़रिया है? अगर शांति मिल जाए तो ठीक, न मिले तो मदद झूठी हो जाती है क्या? जिसे सच में मदद करनी है उसे इस बात की फ़िक्र ही नहीं होती कि इससे उसके मन को क्या मिलेगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401















