
Talking Mirror
सोनिका जी, यही तो स्ट्रूप इफेक्ट की असली चाल है, वो सिर्फ़ आँख और ज़ुबान के बीच नहीं होती, वो नीयत और आदत के बीच भी होती है। जैसे आँख शब्द पढ़ने की पुरानी आदत को रोक नहीं पाती बस उसे पहचान पाती है, वैसे ही सचेत रहना गलती को मिटाता नहीं, बस उसे आते हुए पकड़ लेता है। यह पकड़ ही काफ़ी है, दोहराव को रोकने का दूसरा कोई रास्ता नहीं।
















