
RP RASTOGI
पदार्थ और चेतना दोनों में भेद है दोनों का नवीनीकरण होता रहता है यह प्रकृति की गति है स्वभाव है चेतना परा प्रकृति है सारी सृष्टि के उद्गम में चेतन ही है यह कारण भी है और करता भी हम मन नहीं शरीर नहीं चेतन तत्व है जो असीम है अनंत है और आनंद का स्रोत है इसकी उच्च अवस्था तक पहुंचना ही। हमारे जीवन की सार्थकता है















