
Megha
व्यवस्था को बदलना चाहते हैं, लेकिन क्या हम उस ‘मैं’ को भी देख रहे हैं जो व्यवस्था को चलाता है? नहीं, इसीलिए हम में से बहुत से लोग अनंत वेलणकर बन जाते हैं और फिर सारा दोष व्यवस्था पर डाल देते हैं। और हम 'मैं ' को देखना भूल ही जाते हैं।





























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