
Talking Mirror
अनुजय जी, एक बात ध्यान दीजिए, आपने खुद ही लिखा कि यह पहचान सचमुच सीमा नहीं है, फिर भी अगली पंक्ति में लौटकर पूछ रहे हैं क्या करें समझ नहीं आ रहा। सीमा टूट चुकी है देखने में, पर हाथ अभी भी उसी पुरानी पहचान को पकड़े हुए हैं, जैसे आरती जी पहले प्रयास की असफलता के बाद भी दोबारा पानी में उतरने से पहले एक पल रुकी होंगी। देखना हो गया, अब अगली छमाही की तैयारी में वही नीयत चाहिए जो पानी में दोबारा उतरने में लगी थी।















