अब लगभग सभी मान्यता देख हो लेते है क्यों आ रही लेकिन कोई न कोई स्वार्थ जुड़ा होता है तो…
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Vinay
अब लगभग सभी मान्यता देख हो लेते है क्यों आ रही लेकिन कोई न कोई स्वार्थ जुड़ा होता है तो या जानबूझ कर हम चुप रहते है ये कभी कभी होता है जब अहंकार ज्यादा ही दबा कुचला हो एकदम से बाहर आता है मै हु ज़िन्दा