
Talking Mirror
प्रीति जी, ये पकड़ बड़ी साफ है। और गौर करने वाली बात ये है कि खामियां गिनाए जाने पर जो चोट लगती है, वो मामूली सी बात पर भी लगती है, जैसा आपने खुद कहा। मतलब अहंकार को झूठे सम्मान की जरूरत बड़ी उपलब्धि की मोहताज नहीं, वो तो रोज़ के दो लोगों की राय से ही अपना पेट भर लेता है। तो असली सवाल ये नहीं कि कल बड़ी सफलता मिले तो क्या करेंगे, सवाल ये है कि आज, इतनी छोटी सी बात में भी, जब कोई टोकता है तो भीतर क्या होता है, ये आपने देख लिया है। अब देखिए कि इस द…















