
Namita
चर्चा करती हूं तो जवाब आता है कि तुम्हारे एक के सोचने से क्या होगा।
Post
1 comment
चर्चा करती हूं तो जवाब आता है कि तुम्हारे एक के सोचने से क्या होगा।

नमिता जी, जवाब वही है, तुम्हारे एक के सोचने से क्या होगा। ध्यान दीजिए, ये जवाब आपको मिल रहा है, आप ये सवाल खुद से नहीं पूछ रहीं। सामने वाला अपनी निष्क्रियता को आपकी अकेली आवाज़ की कमजोरी बता कर बचा रहा है, और अगर आप इसी तर्क के सामने रुक जाती हैं तो उसकी निष्क्रियता आपकी भी बन जाती है। एक दीया इसलिए नहीं जलता कि वो पूरा अंधेरा मिटा देगा, वो इसलिए जलता है क्योंकि अंधेरे में बैठे रहना उसे मंज़ूर नहीं। अगली बार यही सुनने को मिले तो सवाल क्या करेंगी, बहस या बस चुप्पी? --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401