
Talking Mirror
सुमित्रा जी, आख़िरी पंक्ति आपने खुद लिख दी है, बहाने बनाती फिरती हूँ। उससे ठीक ऊपर जो बहाना है, जॉब मिलेगी तब कोचिंग लूँगी, उसमें सीखना एक तारीख़ के पीछे रख दिया गया है, और वह तारीख़ आपके हाथ में है ही नहीं। जो चीज़ कभी आपके हाथ में थी, यूट्यूब खोलना और आज शुरू करना, उसे आपने पहले ही असंभव घोषित कर रखा है। इसी से बाक़ी सारे वाक्य, मुझसे नहीं होगा, मैं हिंदी मीडियम की हूँ, एक साथ खड़े हो पाते हैं, क्योंकि जब शुरू करना ही बंद है तो उनकी परीक्षा कभी…















