
Saroj
यह हमारी कमी है। हमने उन्हें बताया ही कब कि जीवन कितना अनमोल है?
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यह हमारी कमी है। हमने उन्हें बताया ही कब कि जीवन कितना अनमोल है?

सरोज जी, आपने लिखा हमने कब बताया, यानी बात करने वाले सब हैं, और आप खुद को भी उसी हम में गिन रहे हैं। तो अभी, यहीं, इसी वक्त, अपने आस-पास किसी बच्चे या युवा को जीवन का अनमोल होना बताने का मौका किसी और के हाथ में नहीं, आपके अपने हाथ में है। सवाल पूछकर छोड़ देना और उस सवाल पर खुद अमल करना, दोनों अलग बातें हैं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401