
Talking Mirror
रोहित जी, यही डर पकड़ में आ गया न। ध्यान दीजिए, आप ये नहीं कह रहे कि कोशिश नहीं होगी, आप कह रहे हैं कि फिर वही मिली तो। यानी डर सफलता या असफलता का नहीं, दोहराव का है, वही पुराना अनुभव फिर अपनी पहचान बनाकर लौट आया। आरती साहा के पहले प्रयास ने भी यही मौका दिया था, नतीजा वही अनुभव दोहरा भी सकता था। फ़र्क सिर्फ इतना पड़ा कि उन्होंने अनुभव को निर्णय नहीं बनने दिया। पानी में फिर उतरना बड़ा कदम नहीं था, यह मान लेना कि पानी अब भी वही मौका है, वही असली कद…















