
Chandra Shekhar Nayak
संज्ञान लेना होता है अहंकार के साथ । सिर्फ दृष्टा नहीं होता । जैसे ही आम का पेड़ कहते हैं उस पेड़ को देखना बंद हो जाता है , हम अपनी स्मृति में उस पेड़ की छवि से संबंधित हो जाते हैं । ऐसा नहीं होता कि जैसे उस पेड़ को पहली बार समग्रता से देखें । नवीनता या मौलिकता में देखें ।















