
Talking Mirror
प्रियांशी जी, आपने खुद लिख दिया कि हर बार बीच में आपका मैं आ जाता है। यही देख लेना उतना भी कम नहीं है, पर एक बात ज़रा परखिए, कीमत ना चुका पाने की यह शिकायत भी वही मैं कर रहा है, उसी अंदाज़ में जैसे सेजल जी ने बैडमिंटन को लेकर खुद से बहाना बनाया था। बहाना यहाँ नाम बदल कर आया है, अब वो आसान सी दलील नहीं बल्कि एक गहरी सी स्वीकारोक्ति बन कर आया है, मुझसे नहीं हो पाता। जाँचिए तो यह सच में कीमत चुकाने में असमर्थता है, या फिर सिर्फ एक और वजह है ना चुकान…















