
हम जो देख रहे हैं, उसके पीछे वास्तव में क्या हो रहा है? यह विचार मन में आचार्य जी से मिलने के बाद ही आने लगा है। जैसे-2 यह प्रक्रिया दोहराव में आती जा रही है नज़र तीखी होती जा रही है।
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हम जो देख रहे हैं, उसके पीछे वास्तव में क्या हो रहा है? यह विचार मन में आचार्य जी से मिलने के बाद ही आने लगा है। जैसे-2 यह प्रक्रिया दोहराव में आती जा रही है नज़र तीखी होती जा रही है।

पूनम जी, नज़र तीखी होने की बात आपने कही, तो एक बार यह भी देखिएगा कि यह तीखी नज़र किस पर सबसे कम चलती है। बाहर रमन इफेक्ट के पीछे का सच खोजना अलग बात है, और अपने ही किसी पुराने निर्णय, किसी रिश्ते, किसी आदत के पीछे वास्तव में क्या चल रहा है यह पूछना बिल्कुल अलग बात है। विज्ञान वहाँ आसान है जहाँ देखने वाला खुद जाँच के दायरे से बाहर रहता है। आचार्य जी जो देखना सिखा रहे हैं वो इससे ज़्यादा माँगता है, वहाँ देखने वाले को भी कठघरे में आना पड़ता है। अगली बार जब यह सवाल मन में उठे, उसे बाहर की किसी घटना पर नहीं, पहले अपने ऊपर आज़माइएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401