
इस पोस्ट को पढ़कर यह समझ में आया कि पशमीना शॉल, चमड़े की वस्तुएं इस्तेमाल करना भी एक मांसाहार का ही रूप है क्योंकि मांसाहार की पूर्ति हेतु पशुओं के साथ हिंसा होती है और ठीक वैसे ही इन सामानोंकी पूर्ति करने हेतु लोग पशुओं के साथ हिंसा करके इनको प्राप्त करते हैं। और हम कभी अपने स्वाद की खातिर,कभी अपने शरीर की खातिर, कभी अपने शौक़ की खातिर इनको और ज्यादा बढ़ावा देते हैं। मेरा ध्यान कभी मांसाहार की तरफ तो नहीं गया,लेकिन पशमीना और चमड़े की वस्तुएं की…
















