
Sandhya
हम संस्कृति को ही अपना धर्म समझ बैठे हैं और संस्कृति में जो कुछ सिखाया गया है परंपरा के तौर पर उसे ही दोहराते रहते हैं जबकि सच्चा धर्म हमेशा हमारी सोच समझ और परख से उपजता है यहां धर्म के नाम पर पाखंड चलता है हिंसा चलती है शोषण चलता है एक लिंग दूसरे लिंग के ऊपर चढ़ बैठता है और उसे कुचलता रहता है जबकि सच्चा धर्म हमें हमेशा प्रेम करुणा और इंसानियत सिखाती है और इंसान की पहचान उसके लिंग से नहीं बल्कि उसकी चेतना से होनी चाहिए यही सच्चा धर्म सिखाता है















