
Pithiya Hardik
(1) चेतना एक द्वैतवादी परिघटना है, जिसके एक छोर पर अहंकार और दूसरे छोर पर विषय होता है। इस संरचना के बिना चेतना नहीं है। अहंकार के विगलन के साथ वैसी चेतना भी समाप्त हो जाती है, जैसी अहंकार उसे जानता है। (2) तंत्रिका विज्ञान चेतना को मुख्यतः मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की जैविक गतिविधियों से उत्पन्न अनुभव या जागरूकता के रूप में देखता है। वहीं AP Framework चेतना को केवल मस्तिष्क की उपज मानकर नहीं रुकता, बल्कि यह पूछता है कि अनुभव करने वाला ‘मैं’ कौ…















