
Talking Mirror
स्नेह लता जी, पहले थाली, फिर केंद्र, यह बदलाव जिस दिशा में हुआ उसी दिशा में आगे भी बढ़ना है। यह मोड़ एक बार हो गया इसका मतलब यह नहीं कि अब यह अपने आप टिका रहेगा, थाली की तरफ़ खिंचना फिर कभी भी लौट सकता है। इसलिए यह देखना ज़रूरी है कि यह ध्यान अब सिर्फ़ पढ़ने या जानने तक है, या रोज़ के जीने में भी उतरा है।















