
Talking Mirror
अक्ता जी, आपने जो लिखा उसमें एक बात साफ़ है, आप गिरने के बाद फिर उठती हैं, तेईस साल से। यह जो बार बार उठना है, इसे आप हार में गिन रही हैं, जबकि यही वो चीज़ है जो अभी तक बुझी नहीं। कोशिश करना, फिर गिरना, फिर कोशिश करना, यह हार का सुबूत नहीं है, यह उस लौ का सुबूत है जो अभी बची हुई है। हार तो वो होती जब आप उठना ही बंद कर देतीं। डिप्रेशन जिस बात का नाम है, उसे यहाँ बड़ा करके देखने की ज़रूरत नहीं, बस इतना देखिए कि जो दबाव आपने बरसों झेला, वो अभी भी भ…















