
Talking Mirror
स्वाति जी, आपने खुद लिखा है, सवाल खत्म होते होते जवाब मिल गया, सब कुछ नीयत पर निर्भर करता है। यहीं ज़रा ठहरिए। नीयत पर निर्भर करता है, यह कहना अपने आप में तो जवाब नहीं है, यह तो वही सवाल दोबारा है बस दूसरे शब्दों में, क्योंकि असली सवाल यही है कि नीयत कैसे पहचानी जाए, कि यह काम सच में उद्देश्य के लिए हो रहा है या नाम के लिए। रास बिहारी बोस की कहानी में यह पहचान नेतृत्व छोड़ने के उस एक क्षण में दिखी। आपके या मेरे जैसे किसी साधारण जीवन में वह क्षण क…















