
Anil
हां ये सिर्फ वस्तुओं के स्तर पर ही नहीं, विचारों और घटनाओं के स्तर पर भी होता है, जैसे मेरे साथ भी कुछ समय पहले एक घटना हुई और में उसे दो महीने से खींचते आ रहा था कि ऐसा मेरे साथ क्यों हुआ? मैने ये क्या कर दिया? या फिर कभी कोई उपमान हुआ तो उसकी छवियां, यादें दिमाग में घूमती रहती थी कि मेरे साथ ये हुआ वो हुआ और भी बहुत कुछ मगर अभी इस आर्टिकल को पढ़कर समझ आया कि बस मैने कहानियां बना ली थीं, मान्यताएं की ये मेरे साथ हुआ - अहंकार(मैं) उसे अभी तक पकड़े…















