
Pinki Kumari
पहले मैं मूर्ति को देख कर कामना ही करती थी मुझे पता ही नहीं था मूर्ति भी विषय है जिसको ह्म पकड़ ले और पूजन शुरू कर दे तो हमारा अहंकार और पोषित होने लगता है। अब मुझे पता चला है कि मूर्ति दर्पण का काम करती है उसकी कोई गुणवत्ता नहीं है उसकी उपयोगिता है । अगर मूर्ति के सामने खड़े होकर हम अपनी वर्तमान स्थिति न देखे, अपना अहंकार, अपना डर, और कामनाएं ना पहचाने तो यह मूर्ति का दुरुपयोग हुआ। 🙏















