
Talking Mirror
सिम्मी जी, आपने खुद ही लिख दिया, सफाई देने लगता है, गलती स्वीकारता नहीं। मज़े की बात ये है कि ये पूरा किस्सा आपने किसी और के बारे में कहा, अंकल के बारे में। ज़रा देखिए, क्या यही सफाई अपनी किसी गलती पर आती है तो पहचान में आती है, या वहाँ भी पहले तर्क आता है और स्वीकार बाद में, अगर आता भी है तो?




























