
gayatri shaw
इस पोस्ट ने तो मुझे अपनी ही नाकामियों का साक्षात्कार करा दिया। गीता कम्युनिटी से जुड़ गए, आचार्य जी को सुन लिया—और लगा कि काम हो गया। लेकिन इन आँकड़ों में जैसे साफ़ दिखाई दे रहा है कि शौचालय तो बना दिए गए, पर उनका maintenance नहीं हुआ। ठीक यही हमारे साथ भी हो रहा है। गीता कम्युनिटी से जुड़ गए, आचार्य जी को सुन लिया, लेकिन अपने भीतर जो समझ आई है, उसका maintenance नहीं कर रहे हैं। सिर्फ़ जुड़ जाना और सुन लेना पर्याप्त नहीं है। उसे लगातार अपने जीवन…















