
किरण Bhardwaj
मुझे लगता हैं कि मेरे घर में बाकी सबमे बुराई है सब मेरे पीछे पड़े रहते है। परेशान करने के लिए। क्यूं लंबे अरसे से ये मान्यता है मेरी की क्या अच्छा है क्या बुरा है। उसी लोकधर्म के आधार पर जज करती हूं। बहुत छोटी छोटी चीजें परेशान करती है। जब आचार्ज जी और संस्था से जुड़ी तब समझ आता है कि बुरा जो देखन मै चला बुरा न मिल्या कोय जो मन खोजा अपना मुझसा बुरा न कोय। समझ आता है कि जब तक किसी सार्थक काम में खुद न लगा पाओ तो बहुत टेम्परी किस्म के लोग सर पर…















