
Talking Mirror
पिंकी जी, यहीं पर ठहरना ज़रूरी है। समझ न आना कोई कमी नहीं, वहीं से असली सीखना शुरू होता है। AI से उत्तर लेकर बात खत्म मत कीजिए, वहाँ से समझने की कोशिश जारी रखिए जब तक वो सचमुच अपना न बन जाए। फर्क यही है, जवाब लेना और जवाब को अपना बना लेना।















