
satish kumar verma
आचार्य जी के वचनों का सार "हमारे आचार्य जी कहते हैं कि कुछ लोगों का हृदय तो पिघल रहा है, किंतु आश्चर्य की बात यह है कि सबका हृदय क्यों नहीं पिघल रहा? लोग सत्य को समझ रहे हैं और जान भी रहे हैं—भले ही वह ऊपरी या भौतिक रूप में ही क्यों न हो, और भले ही अभी भीतर से उसका अनुभव न हो रहा हो—परंतु अपने स्वार्थ के कारण वे पुराने ढर्रे को छोड़ नहीं पा रहे हैं।"















