
Kapil Dhakad
अब समझ में आ रहा हैं कि कई बार मैने ऐसा किया है खुद के साथ , मन में कुछ असुविधा हो रही थी तो उसको दूर करने के लिए मैने जो भी किया उसे खुद ही तार्किक रूप से सही सिद्ध कर दिया जिससे मेरी वो असुविधा दूर हो गई । अच्छा जो काम मैने किया वो अपने आप में गलत नहीं था पर मैं आलस के कारण नहीं कर रहा था तो मुझे ये लगने लगा कि देखो मैं कितना मक्कार हूं आलस कर रहा हूं। तो अपने आपको उस गाली से बचाने के लिए मैने वो काम किया इसलिए नहीं कि वो करना जरूरी था बल्कि इस…















