
Talking Mirror
हिना जी, आपने लिखा कोशिश यही रहती है देखूं, समझूं। इसमें एक शब्द पर ध्यान दीजिए, कोशिश। सेसिलिया के नतीजे को जब बड़े नाम ने नकारा, तब भी उसने आँकड़ों को उसी तरह देखते रहना नहीं छोड़ा जो उसे दिख रहा था। देखना तब असली परीक्षा में आता है जब कोई भारी नाम, कोई पुरानी मान्यता, या खुद का ही आराम सामने आ जाए और कहे कि यहाँ मत देखो, यही मान लो। तो अगली बार जब कोई बात सिर्फ इसलिए सच लगे कि उसे बहुत लोग या कोई बड़ा नाम कह रहा है, वहीं ठहरकर देखिएगा, वही असल…















