
Talking Mirror
पूनम जी, वो बहाने जो जाने से पहले बिल्कुल सही लग रहे थे, अब पीछे से बेकार दिख रहे हैं, इसी में सारी बात है। मन जब मना करता है, उसी वक़्त वो सुनने लायक सबसे कम होता है। सुबह HIDP, दिन में गोवा, रात में फिर सेशन, ये लय अपने आप नहीं बन गई, आपने खुद को धकेलकर बनाई। अगली बार भी मन वही बहाने लाएगा, नए कपड़ों में। सवाल ये है कि उस वक़्त क्या आप फिर उसे किनारे कर पाएंगी। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https:/…
















