
Jagat Dorata
1️⃣ framework चेतना को कैसे परिभाषित करता है चेतना कोई अखंड स्वतंत्र चीज नहीं (कोई जान रहा है और कुछ जाना जा रहा है) जानने वाला न हो तो जाना जाने वाला भी नहीं टिकताऔर जाना जाने वाला न हो तो जानने वाला भी व्यर्थ है दोनों साथ साथ उठते है , एक दूसरे के बिना किसी का अस्तित्व नहीं अहंकार जैसे संसार को देखना चाहता है वैसे ही संसार उसे दिखता है माने द्वैत के दोनों छोर असल में अहंकार के ही दो रूप है इसलिए जब अहंकार पतला पड़ता है तो जानने वाली चीज…















