
Alka
क्या मेरा ज्ञान मेरे मैं को देख पा रहा है , और मै को समझ कर खुद को अपने ही बनाए भ्रम जाल से मुक्त कर पा रहा है
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क्या मेरा ज्ञान मेरे मैं को देख पा रहा है , और मै को समझ कर खुद को अपने ही बनाए भ्रम जाल से मुक्त कर पा रहा है

अलका जी, यह सवाल आपने खुद से पूछा है, यही असली बात है। ध्यान दीजिए, यह सवाल किसी निश्चित जवाब की तलाश में नहीं है, यह खुद जाँच की शुरुआत है। जो मैं यह पूछ रहा है कि क्या मैं खुद को देख पा रहा हूँ, वह मैं उतनी देर के लिए अपने ही जाल से थोड़ा बाहर आ चुका होता है। यह सवाल बार बार पूछते रहिए, जवाब में टिक जाना ही असली फंसना है।